फर्जी मुकदमे से पत्रकारों में आक्रोश, दिया ज्ञापन

फर्जी मुकदमे से पत्रकारों में आक्रोश, दिया ज्ञापन

एक ट्वीट बना फर्जी मुकदमे का कारण लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला जिलाधिकारी के हटानें व वित्तीय जांच की रखी मांग

फ़तेहपुर । जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष के खिलाफ फर्जी मुकदमा पंजीकृत होने से पत्रकारों में बेहद आक्रोश है उसी को लेकर संघ के नेतृत्व में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। जिसमें फर्जी मुकदमे को तत्काल स्पंज करने व जिलाधिकारी के कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई।
आपको बता दें कि कोविड-19 की लड़ाई में लगातार पत्रकारों ने प्रशासन का सहयोग किया है मगर खामियों को उजागर करने से खिन्न जिलाधिकारी संजीव सिंह लगातार जनपद में पत्रकार उत्पीड़न कर रहे हैं उनके उत्पीड़न से आहत पत्रकारों ने 30 मई को पत्रकारिता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। ज्ञापन के माध्यम से संघ के अध्यक्ष अजय भदौरिया ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व निरीक्षक को वादी बनाकर एक फर्जी आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है जिसमे एक ट्वीट के माध्यम से कम्युनिटी किचन बंद होने की अफवाह फैलाने का आरोप व एक रैकेट चलाने का अनर्गल आरोप लगाया गया है। श्री भदौरिया ने कहा कि पत्रकारों का सबसे लंबी अवधि तक अध्यक्ष रहने के दौरान और 32 वर्ष की पत्रकारिता में पहली बार किसी अधिकारी द्वारा इस तरह के अनर्गल आरोप लगाकर जनता, प्रशासन और शासन में छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया है जो स्पष्ट द्वेष भावना से ग्रसित नज़र आ रहा है। इसी प्रकार जनपद के दो प्रमुख पत्रकारों के खिलाफ गौशालाओं की खामियां उजागर करने पर एक मुकदमा इन्ही के ब्यक्तिगत दबाव पर लिखा गया था। जिसके बाद पत्रकार आंदोलित हुए थे तब जनपद के दूसरे बड़े अधिकारियों ने मध्यस्थता करके मुकदमे को स्पंज करने का आश्वासन दिया था। लेकिन जिलाधिकारी का लगातार उत्पीड़न जारी है कोविड 19 के खिलाफ जनपद के सभी पत्रकार प्रशासन का लगातार सहयोग कर रहे हैं फिर भी कुछ पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से इनके द्वारा अपमानित किया गया। अध्यक्ष श्री भदौरिया ने ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया है कि पद का दुरुपयोग करते हुए जिलाधिकारी के दबाव में जो मुकदमे पंजीकृत हुए हैं उनको समाप्त करते हुए दोषी जनों पर कानूनी कार्यवाही करने की कृपा की जाए। उन्होंने यह भी कहा अगर 15 दिवस के अंदर पत्रकारों के ऊपर दर्ज फर्जी मुकदमे समाप्त नहीं हुए और जिलाधिकारी के कार्यकाल की वित्तीय व पद दुरुपयोग की जांच नहीं हुई तो आगामी 30 मई को सभी पत्रकार पत्रकारिता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाएंगे। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अनुमति लेकर कलेक्ट्रेट या विधान भवन के सामने विरोध दर्ज कराने के लिए मजबूर होंगे।

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