केसर की खेती से किसानों की किस्मत चमकेगी*

*केसर की खेती से किसानों की किस्मत चमकेगी*केसर की फसल से होने वाली कमाई किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में अब फतेहपुर के एक किसान ने केसर की फसल से मालामाल होने की ठानी है। किसान ने अपने खेत में इस बार धान गेंहू के बजाय केसर की फसल ली है। वैसे तो फतेहपुर का मौसम आलू की खेती के लिए भी माकूल है। लेकिन यहां किसान अब बंपर पैसा देने वाली केसर की फसल उगाने को तैयार हैं। केसर की फसल से होने वाली कमाई किसानों को आकर्षित कर रही है। फतेहपुर के असोथर इलाके में एक किसान ने धान गेंहू की फसल छोड़कर केसर की फसल लगाई है। इस फसल पर किसान को 50 हजार का खर्चा आया है। कृषि विभाग के अधिकारी के मुताबिक केसर की फसल लगाई गई है इस समय केसर की तोड़ाई होने लगी है
कृषि अधिकारी ने कहा कि अगर अन्य किसान भी केसर की फसल उगाने का प्रयास करते हैं तो वे एक एकड़ में 20 से 25 किलो तक केसर उगा सकते हैं। वर्तमान में केसर का भाव 80 हजार से 1 लाख रुपए किलो तक है। यह फसल किसानों को बड़ा फायदा दे सकती है। यह फसल 7 महीनों में तैयार हो जाती है। इसके बाद केसर के फूलों को लेकर सुखाया जाता है और केसर तैयार की जाती है। इसके बाद केसर के फूलों को लेबोरेटरी में क्वालिटी टेस्ट के लिए भेजा जाता है। क्वालिटी सर्टिफिकेट मिलने के बाद केसर बिकती है।केसर की खेती के लिए किसान ने समाचार पत्र में पढ़ा था और उसी आधार पर उसने 10 बिस्वा जमीन के लिए गढ़ा के किसान पप्पू निषाद से अमेरिकन केसर का बीज मंगाकर बिजाई की. किसान संदीप कुमार के अनुसार बताया कि उसने एक समाचार पत्र में पोखरी मजरे गढा के किसान द्वारा केसर पैदा करने की स्टोरी पढ़ी थी, जिसके बाद उसे अपनी जमीन पर केसर की फसल उगाने का आइडिया आया.तीन साल पहले पोखरी मजरे गढ़ा गांव के रहने वाले पप्पू निषाद ने केसर की खेती करने की शुरुआत की मूलतः ठंडे प्रदेशों में पैदा होने वाली केसर की ऐसी प्रजाति वह खोजकर कश्मीर से लेकर आए जिसे यमुना तटवर्ती गांव में पैदा किया जा सके महंगा बीज खरीदकर उक्त किसान ने थोड़े से क्षेत्रफल में इसकी शुरुआत की फूल से निकलने वाले केसर और बीज की बिक्री से मुनाफा हुआ तो दायरा बढ़ता चला गया महज दस बिस्वा से शुरुआत हुई खेती मौजूदा समय में 3 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में हो रही है पहले दूसरे व तीसरे वर्ष हुए मुनाफा को देखते हुए दूसरे किसानों ने खेती का क्षेत्रफल बढ़ाया*केवल एक बार की जाती है सिंचाई*संदीप कुमार ने बताया कि सबसे पहले खेत की मिट्टी की टेस्टिंग करानी होती है. इसके बाद खेत को पूरी तरह ऑर्गेनिक बनाना होता है. कोई भी केमिकल नहीं डाले, जिससे केसर की गुणवत्ता बेहतर की जा सके. इसके बाद गोबर की खाद डालने के बाद सिंचाई करनी होती है केसर में सिंचाई केवल एक बार मे ही तैयार हो जाती है फरवरी में पूरी फसल में फूल आ गए और मार्च के अंतिम सप्ताह में फसल तैयार हो जाएगी. फसल में लगने वाले कीड़े आदि के बारे कृषि विभाग के विशेषज्ञों से भी वो लगातार संपर्क में रहे.*कैसे बीमारियों से बचाया*10 बिस्वा भूमि में अक्टूबर में एक-एक फीट की दूरी पर बिजाई की थी. इसके बाद फसल की देखभाल करते रहे इस फसल में फंगस लगती है, जिससे बचाव के लिए देशी उपाय के रूप में नीम के पत्ते, आखड़ा और धतूरे के पत्तों को पानी में उबालकर फसल पर छिड़काव किया जाता है. फसल के लिए तापमान भी 8 से 30 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए. फसल के लिए बारिश लाभकारी, तेज हवा और ओलावृष्टि नुकसानदायक होती है.*फसल के अवशेष होते हैं हवन में प्रयोग*किसान ने बताया कि केसर की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके बीज, केसर तो महंगे बिकते ही हैं, साथ में फसल के अवशेष भी हवन सामग्री में इस्तेमाल किए जाते हैं. केसर को बेचने के लिए वे राजस्थान , दिल्ली या गुजरात के व्यापारियों से भी संपर्क करेंगे.