पोषण पुनर्वास केन्द्र में मनी को मिली नई जिन्दगी

पोषण पुनर्वास केन्द्र में मनी को मिली नई जिन्दगीपोषण पुनर्वास केन्द्र में बच्चों को दिया जा रहा पोषक पदार्थ
कई बच्चों के सेहत में हुआ सुधार, लोगों में दिख रहा उत्साह
मनभावन अवस्थी की रिपोर्ट :- फतेहपुर के भिटौरा विकास खंड के दिहुली गांव की नन्ही मुन्नी मनी की मनमोहिनी हंसी हर किसी को भा रही है। पिछले दिनों यह बच्ची उल्टी दस्त से परेशान होने के बाद जिंदगी और मौतसे जूझ रही थी लेकिन आरबीएसके और एनआरसी टीम की मदद से समय से इसे जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचा कर नई जिंदगी दी गई।
दिहुली गांव के रहने वाले राजू और अंकिता की नौ महीने की बेटी मनी को अक्सर डायरिया की समस्या रहती थी। बीते बीस मार्च को भी वह डायरिया से ग्रसित हो गई। आंगनबाडी केंद्र में जब आरबीएसके की टीम ने मनी की जांच की तो वह कुपोषित पाई गई। इस पर डाक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जिला अस्पताल के लिये रेफर कर दिया। आरबीएसके टीम की मदद से बच्ची मनी को जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। यहां पर प्रभारी चिकित्सक डा0 रघुनाथ सिंह टीम के साथ बच्ची का इलाज किया और उसे ठीक किया। बच्ची का वजन कम होने की वजह से वह कुपोषित थी इसलिये उसे जिला अस्पताल के ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर उसके पोषण का ध्यान भी दिया जा रहा है।
चिकित्सक के अनुसार अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ्य हो गई है। उन्होंने बताया कि जब बच्ची इलाज के लिये आई थी तब वह बहुत कमजोर थी और उसका वजन करीब पांच किलो था लेकिन अब उसका वजन साढे छह किलो हो गया है। अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक मनी जैसे 80 बच्चे स्वस्थ्य होकर अपने घर को लौट चुके है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर फेस मास्क, फिजिकल डिस्टेसिंग और साफ-सफाई के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए, बच्चों को स्वस्थ्य जीवन की राह दिखाई जा रही है। मनी की मां अंकिता ने बताया कि उन्हें केन्द्र में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। बच्चे के साथ उन्हें भी पौष्टिक आहार जैसे दूध, सब्जी, हरेपत्तेदार, सब्जी, रोटी निःशुल्क उलब्ध कराया गया। केन्द्र पर तैनात डाक्टर समय-समय पर आकर बच्चे का हालचाल लेते रहे। उन्होंने बताया कि बच्ची को उल्टी-दस्त की शिकायत थी इसके कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उसे एनआरसी सेन्टर में भर्ती कराया था। बच्चे की हालत अत्यन्त खराब थी। एनआरसी सेन्टर में जब बच्ची ईलाज के दौरान ठीक होने लगी तो उसे खेलने की भी सुविधा उपलब्ध कराई गयी। अब बच्ची ठीक होने लगी। एनआरसी पर तैनात चिकित्सक डा0 रघुनाथ टीम के साथ देखरेख में कोरोना प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करवाया जा रहा है। एक दूसरे से दो गज की दूरी रखी जा रही है और सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।
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समर्पित भाव से काम रहे है स्वास्थ्यकर्मी-
मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर गोपाल कुमार माहेश्वरी ने बताया कि बाल विकास विभाग की ओर से अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक एनआरसी सेन्टर में 120 बच्चे एनआरसी सेन्टर में भर्ती कराये गये थे इसमें से 80 बच्चे जो जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराये गये थे वह स्वस्थ्य होकर अपने घरों को लौट चुके है। इसके अलावा बच्चों के ईलाज के लिए दो डाक्टर समेत आधे दर्जन स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है।